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कविता: चलो उठो फतह करो

Posted: Tue Jan 12, 2016 12:03 pm
by csahab
बहुत दिनों के बाद कुछ प्रस्तुत कर रहा हूँ, आशा करता हूँ आपको ये रचना पसंद आएगी.

चलो
उठो
फतह करो

हौसलें बुलंद कर
सीने को ज्वाला से भर
मार्ग तू प्रशस्त कर.
चलो,
उठो,
फतह करो.

चेहरे पर मुस्कान लिए
भीतर एक तूफ़ान भर
ज़ज्बे से विरोधी को परास्त कर.
चलो,
उठो,
फतह करो.

हौसलों के पंख खोल
औरों से ऊँची उड़न भर
हर चुनौती पार कर. पार कर.
चलो,
उठो,
फतह करो.

चापों से चट्टान हिले
नदियों की रफ़्तार थमे
रोम-रोम से ललकार कर.
चलो,
उठो,
फतह करो.

गरज़ बरस हुंकार भर
लक्ष्य पर प्रहार कर
रण को अपने नाम कर.
चलो,
उठो,
फतह करो.

copyright@csahab

Re: कविता: चलो उठो फतह करो

Posted: Thu Jan 14, 2016 6:53 pm
by Anurag
Wah! Kya baat hai!

Re: कविता: चलो उठो फतह करो

Posted: Thu Jan 14, 2016 7:18 pm
by jungle ki raani
Its a song! What did you write it for?

Re: कविता: चलो उठो फतह करो

Posted: Thu Jan 14, 2016 9:20 pm
by csahab
Motivational anthem

Re: कविता: चलो उठो फतह करो

Posted: Tue Jan 26, 2016 7:44 pm
by jungle ki raani
Its so nice...