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पहचान कौन ?

Posted: Tue Nov 08, 2011 4:40 pm
by csahab
अक्सर रात में जब ऑफिस से लेट घर जाता हूँ तो घर पहुच कर बड़ा अजीब लगता है. क्योंकि मेरी माता श्री को छोड़ कर सब सो चुके होते हैं. आपके पास किसी से बात करने का समय नहीं होता. सबसे बड़ी बात होती है कि कभी-कभी मेरा भतीजा जिसे रात में सुलाने के लिए नाकों चने चबाना पड़ते हैं, वो भी मेरा इंतज़ार करता है. और अपनी तोतली आवाज़ में पूछता है ओफिज से आए हो. खाना नहीं खाओगे. मेरे मना करने पर थोड़ी देर मेरे साथ बात करते-करते धीरे-धीरे सो जाता है. फिर मैं अपनी सालों पुरानी पर अब तक ना पड़ने वाली आदत से मजबूर टीवी देखने लगता हूँ. मुझे रात में टीवी देखना थोड़ा ज्यादा पसंद है. क्योंकि आप बिना किसी रोक टोक के चैनल बदल-बदल कर देख सकते हैं. पर रात में एक समस्या भी होती है वो है जब आप चैनल बदलते हैं तो कमरा लाइट से भर जाता है और फिर नए चैनल से फिर अँधेरा हो जाता है. रात में अंग्रेजी-हिंदी फिल्मों के साथ-साथ एक सबसे अच्छी चीज़ आती है वो है टेली शॉपिंग नेटवर्क. यह आपको दुनिया की नायाब से नायाब चीजें सबसे सस्ती और टिकाऊ तरह से बेचते हैं फिर वो चाहे सोफा हो या नज़र यन्त्र या फिर चवनप्राश का दादा पॉवरप्राश. इसके साथ एक और चीज़ आती है जो मुझे सबसे अच्छी लगती है उसका नाम है पहचान कौन? ये नाम मैंने दिया है. कारण है इसमें २ चेहरों को एक साथ मिला दिया जाता है और फिर पब्लिक से पूछा जाता है अगर आप दोनों चेहरों को पहचान चुके हैं तो अभी कॉल करिये, आप जीत सकते हैं ५०००० तक ईनाम.अभी कॉल करिये.

इसमे कई बार क्या, हर बार इतने आसान और बड़े-बड़े लोगों या फिल्म स्टार के चेहरे लगाए जाते हैं कि अंधा भी पहचान ले. पर मजाल है पब्लिक का कोई बन्दा उन्हें पहचान पाए. अगर सलमान और शाहरुख खान की पिक्चर है तो लोग फोन करके कहते हैं कि आमिर खान या संजय दत्त. तब एंकर उनको बड़े प्यार से कहतें है आप बहुत करीब पहुच गए थे पर अफ़सोस ये गलत जवाब है. जल्दी से फोन करिये. फिर अगला कॉल आता है वो कहेगा अमिताभ बच्चन. फिर क्या! सुनते ही हँसी निकल जाती है. जब आप उनको कॉल करते हैं तो १० रू प्रति मिनट का खर्चा आता है. ये बात शायद मेरे एक पड़ोसी की पत्नी को नहीं पता थी. उसको लगा कि इतना आसान सा सवाल है अगर वो बता दे तो 50000 उसके हो जायेंगे यही सोच कर उसने कॉल कर दिया. इसके बाद तो जैसे अजगर अपने शिकार को फंसाता है वैसे ही कंपनी ग्राहक को उसमे फसाती चली जाती है. और ग्राहक को पता ही नहीं चलता कि वो १० रु प्रति मिनट से अपनी भी पैर पर कुल्हाड़ी चला रहा है. और उसे कुछ नहीं मिल रहा है. क्योंकि फोन पर वो सिर्फ अपना नाम, पता और पता नहीं क्या क्या नोट करा रहा होता है जो कि कछुआ चाल से होता है.

कुछ देर बाद पता चलता है किसी ने एक एक्टर का नाम सही-सही बता दिया पर दूसरा नहीं बता पा रहा है. फिर क्या ईनाम कि राशि बढ़ जाती है. उधर कॉल करने वाली कि धड़कन बढ़ जाती है कि ईनाम उसको मिलेगा या नहीं. आखिर में ना जाने कितने मिनट कि जद्दोजहद के बाद उसे पता चलता है कि उसे लूट लिया गया.

खैर ये तो था मेरा अनुभव, सच मानिए उस प्रोग्राम देखते वक्त में सबसे ज्यादा हँसता हूँ. ये पहचानने का खेल कभी-कभी मेट्रो में भी होता है. जब आप रोज मेट्रो में सफर करते हैं, तो आपको कुछ चेहरे हर रोज दिखाई देते हैं. और जब आप अलग-अलग समय पर यात्रा करते हैं तो आपको सारे चेहरे एक जैसे लगते हैं. और कभी-कभी लगता है इसको कहीं देखा है. वैसे मेरे साथ एक दो बार ऐसा हुआ कि मुझे मेरे साथ मेट्रो में चलने वाले मार्केट में दिखाई दिए, मैं सर पकड़ कर बैठ गया कि इसको किधर देखा है, किधर? दिमाग में सारे तीर चलाने के बाद पता चलता है, अरे ये तो मेट्रो में दिखा था. फिर क्या, लग जाता हूँ अपनी शॉपिंग करने में यही सोच कर कि अब कोई नया चेहरा दिखे, जो मुझे याद ना हो.

Re: पहचान कौन ?

Posted: Sun Nov 13, 2011 8:26 am
by Hasmukh
I often feel the same. When travelling by metro I wonder who these people are, have I seen them before, what do they do, where do they come from, where do thety go etc... wonder if I will ever walk up to them and talk...

Re: पहचान कौन ?

Posted: Fri Nov 18, 2011 1:19 am
by Ek Kanya
we only think about people we love. for people we dont know, we really dont care.

Re: पहचान कौन ?

Posted: Fri Nov 18, 2011 12:35 pm
by vasanth
Can you imagine caring about each one of the other billion people just in India? and then the other 6 Bil in the world?

Re: पहचान कौन ?

Posted: Sun Nov 27, 2011 9:33 pm
by Anjana Kamat
Yes. Mother Teresa DID think of caring for them. You can too, if you can get your eyes off the computer screen.

Re: पहचान कौन ?

Posted: Mon Nov 28, 2011 11:32 am
by vasanth
Mother Teresa was one in a bil, the church providing for my needs, i need to work to get shit for myself and for that i need to care more about my screen...

Re: पहचान कौन ?

Posted: Wed Nov 30, 2011 9:33 am
by basant kumar
their business is making money from the damn phone calls! Rs 10 a minute! Imagine!