क्या है जिंदगी ?
Posted: Tue Mar 29, 2011 3:25 pm
क्या है जिंदगी ?
उलझी हुई डोर सी लगती है कभी, हर सुलझती गाँठ से उलझती है जिंदगी.
क्या कहू तुझे ऐ जिंदगी, हर पल समझता हूँ तुझे फ़ना जिंदगी.
बहुत कुछ सिखा है तुझसे, गिर कर उठाना, फिर चलना है जिंदगी.
जब सोचा बहुत हुआ अब और नहीं, हिम्मत करके लड़ना है जिंदगी.
मुक्कदर में लिखा है मिलेगा, ना मिले गर तो लड़ वो भी पायेगा जिंदगी.
साहस को तपा कर और बना साहसी, फिर बोल कहाँ है जिंदगी.
कर सामना हर मुश्किल, जो हार गया तो क्या है, फिर उठ अभी भी बाकी है जिंदगी.
सोचता हूँ की होगा अब कुछ नया, उसी पल नए करवट लेती है जिंदगी.
हर बार नए कदम बढाता, सोच कर यही की अब तो बदलेगी जिंदगी.
जिऊंगा ऐसे कि मैं ना याद रखूं, जिंदगी कहे वह क्या जी जिंदगी.
उलझी हुई डोर सी लगती है कभी, हर सुलझती गाँठ से उलझती है जिंदगी.
क्या कहू तुझे ऐ जिंदगी, हर पल समझता हूँ तुझे फ़ना जिंदगी.
बहुत कुछ सिखा है तुझसे, गिर कर उठाना, फिर चलना है जिंदगी.
जब सोचा बहुत हुआ अब और नहीं, हिम्मत करके लड़ना है जिंदगी.
मुक्कदर में लिखा है मिलेगा, ना मिले गर तो लड़ वो भी पायेगा जिंदगी.
साहस को तपा कर और बना साहसी, फिर बोल कहाँ है जिंदगी.
कर सामना हर मुश्किल, जो हार गया तो क्या है, फिर उठ अभी भी बाकी है जिंदगी.
सोचता हूँ की होगा अब कुछ नया, उसी पल नए करवट लेती है जिंदगी.
हर बार नए कदम बढाता, सोच कर यही की अब तो बदलेगी जिंदगी.
जिऊंगा ऐसे कि मैं ना याद रखूं, जिंदगी कहे वह क्या जी जिंदगी.