कॉमनवेल्थ गेम्स के चक्कर में, लड़का हुआ शिकार लड़की की टक्कर

Make your general posts here. About just everything!

Moderators: kikikikikiki, diptanshu, Dalbir

Post Reply
User avatar
csahab
Posts: 268
Joined: Wed May 12, 2010 3:19 pm
Location: Gurgaon
Contact:

कॉमनवेल्थ गेम्स के चक्कर में, लड़का हुआ शिकार लड़की की टक्कर

Post by csahab »

कॉमनवेल्थ गेम्स से सरकार को उतना फायदा नहीं मिला होगा जितना कष्ट आम जनता को हुआ होगा बसों की हालत खराब है यात्री बेहाल हैं और सरकार लाइलाज है । जैसे जैसे कॉमनवेल्थ गेम्स की तारिख पास आ रही है वैसे वैसे आम लोंगो की दिक्कत बढती जा रही है । हालाँकि इसके दूरगामी परिणाम अच्छे होंगे पर अभी तो लंका लगी हुई है ना । बाद का क्या हम हो न हो दिल्ली सवर गई तो क्या, हमें तो कष्ट हो रहा है ना । ऐसा कई लोग बार बार लगातार सोचते हैं न जाने दिन में कई बार पर कर कुछ नहीं पाते ।

कॉमनवेल्थ गेम्स के कारण ब्लू लाइन बसों को बंद करा दिया है और सरकारी बस सरकार की तरह सुस्त और फुस्स है । कब चले और कब रुके कुछ पता नहीं। जो बड़ी बस आयीं है वो भर जाने पर इस तरह से चलती है की पूछो मत । उनमे जगह कम और भोकाल ज्यादा है । खैर उनके इंतज़ार में न जाने कितनी देर खड़ा होता हूँ स्टैंड पर, पर वो नहीं आती बस उसकी आस आती है और आस पे साँस चलती है और साँस को थाम कर में किसी भी बस में चढ़ जाता हूँ जो मेरे गंतव्य स्थल पर जाती हैं और दिन की शुरुवात बस में धक्के खाने के साथ करता हूँ ।

और आज कल अंत भी उसी के साथ करता हूँ क्योंकि वापसी में बस तो नदारद रहती है । बस स्टैंड पर भीढ़ इतनी की ना जाने कहाँ से ५-६ खोमचे वाले रोज कुछ न कुछ बेचते नज़र आते हैं और सच मानिये स्टैंड पर खड़े लोगों से ज्यादा भूखे लोग मैंने कभी नहीं देखे । खोमचे वालों का सब कुछ खत्म कर देते हैं । हम लोगो को यात्रा के नाम पर बहुत भूख लगती है । मैंने देखा है कितनी भी महगाई आये पर खाने के सामान में कोई कमी नहीं होती जो चीज़ जितनी महगी होती है वो उतनी ज्यादा बिकती है और खाते हुए हम सरकार की न जाने कितनी पुश्ते गिन जाते हैं ।

रात में ऑफिस से घर जाते वक्त किसी तरह घर जाने की जिद होती है पर इसमें कोई कोई हमसे भी ज्यादा जिद्दी होते हैं । मसलन कल एक जनाब मिले वो शाम के ६ बजे से एक विशेष नंबर की बस के इंतज़ार में खड़े थे और जब में स्टैंड पर पंहुचा तो ८ बज चुके थे । पर वो जनाब किसी और बस में जाने के बजाए उसी के इंतज़ार में थे उनके बस का नंबर और मेरे बस का नंबर एक ही था तो मैं हालत समझ गया और अपनी यात्रा टुकड़ों में करने की सोची और घर जाने के सीधे क्रम को ३ हिस्सों में बाँट दिया ।
पहला हिस्सा ४ किलोमीटर का था जो कम देर चला और बस से उतर कर दूसरे क्रम की बस में चढ़ गया । बस में सवारी इस कदर भरी हुई थी जैसे बोरी में चीनी भर के हिला दिया गया हो और फिर से चीनी डालने की तैयारी हो बस जब स्टॉप पर रूकती थी तो हर कोई यही मनाता था की बहुत लोग उतरे और कोई न चढ़े । बस फिर से चली पर रुक गई देखा एक सामान्य कदकाठी की लड़की एक लड़के को बेतहाशा रूप से मार रही थी । वो दोनों उसी बस से उतरे थे जिसमे में था । मुझे लड़की की फुर्ती देख कर बड़ा अचम्भा हुआ उसने कोई ५ सेकेंड में १० तमाचे मार दिए होंगे जिसकी मुझे क्या उस लड़के को भी उम्मीद नहीं होगी उसके बाद तो हीरो की लिस्ट बड़ी लंबी होती गई सब उसकी मदद में हीरो बनने के लिए आगे आ गए । लोगो का कहना था की लड़की को टक्कर लग गई थी लड़के से, बेचारा बिना बात के कॉमनवेल्थ गेम्स का शिकार हो गया और बस आगे बढ़ गई ।
QR Image Cool image
User avatar
Allen Mathews
Posts: 435
Joined: Sun May 14, 2006 4:23 pm
Location: Chennai

Re: कॉमनवेल्थ गेम्स के चक्कर में, लड़का हुआ शिकार लड़की की टक्कर

Post by Allen Mathews »

hey man, I read your posts. You know I really like your style. You take a long time to come to the point, but your writing is rather enjoyable. keep it up.
Hello! I am Allen Mathews. I want to make films.
User avatar
Ek Kanya
Posts: 1930
Joined: Fri Jan 19, 2007 10:02 am
Location: Somewhere in a WPP agency in India

Re: कॉमनवेल्थ गेम्स के चक्कर में, लड़का हुआ शिकार लड़की की टक्कर

Post by Ek Kanya »

allen is right. Ilove reading the posts as well. keep it up :)
Post Reply