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जम के बरसो आज .....बरसात पे मेरी नयी कविता

Posted: Mon Jul 12, 2010 7:59 pm
by csahab
जम के बरसो आज ........
जम कर बरसो आज
धो दो सारी पानी वाली आग
लोग हो जाये तुमसे निहाल
और फिर कहे तुम क्यों आये आज

तुम तब भी ना रुकना
तुम अपने वेग तो मत थमने देना
रफ़्तार और बढा देना
बुँदे और बड़ी कर देना

फिर लोग कहेंगे
आज तुम क्यों बरसे , इतना विशाल
तुम फिर भी मत सुनना इनकी
ये तो लोग है ये सिर्फ कहते है

तुम कम बरसो तो ये कहेंगे
ना बरसो तो ये कहेंगे
कम बरसो तो ये कहेंगे
मंद बरसो तो ये कहेंगे

तुम करो वही जो तुम्हे लगे सही
जितना मर्ज़ी हो उतना बरसो
दिखा तो रास्तो को रास्ता
जम के बरसो आज