जागती ऑंखें बताती हैं...कोई सोया नहीं रात भर,
याद करता रहा तारे गिन-गिन, वो रात भर ।
बिस्तर की सिलवटें कहती हैं...कोई सोया नहीं रात भर,
गिनते रहे करवटों का बदलना, वो रात भर ।
किताबों में रखे गुलाब बताते है...कोई सोया नहीं रात भर,
मुरझाये फूलों से पाते रहे खुश्बू का अहसास, वो रात भर ।
खतों की सूखी स्याही बताती है…कोई सोया नहीं रात भर,
यादों के हर पल को शब्द बनाकर जागते रहे, वो रात भर ।
कमरे का स्याह रंग बताता है…कोई सोया नहीं रात भर,
ख़ामोशी पर भी आवाज़ का अहसास पाते रहे, वो रात भर ।
उनके साथ बिताये हर पल बताते हैं...कोई सोया नहीं रात भर,
उनकी छुअन का अहसास महसूस करता रहा, वो रात भर ।
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कोई सोया नहीं रात भर
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कोई सोया नहीं रात भर
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- Shahrukh Khan
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Re: कोई सोया नहीं रात भर
Superb! You should be writing movie lyrics...
PS: I am NOT, I repeat, I am NOT, the real Shahrukh Khan. 
Re: कोई सोया नहीं रात भर
Excellent! You are a genius!